ब्रिटिश काल के नैनीताल में एक दुकान भवन में काष्ठ कला अंकन, अलंकरणTraditional House Wood Carving Art in Mallital Nainital;
कुमाऊँ, गढ़वाल, उत्तराखंड के भवन ( बाखली, तिबारी, निमदारी, जंगलादार मकान, खोली , कोटि बनाल) में 'काठ कुर्याणौ ब्यूंत' की काष्ठ कला अंकन, अलंकरण -
संकलन - भीष्म कुकरेती
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यह एक सुखद सूचना है कि नैनीताल जैसे स्थलों के भवनों के ब्रिटिश काल के छाया चित्र सोशल मीडिया में उपलब्ध हो रहे हैं। ऐसे ही मल्लीताल बजार नैनीताल के एक दुकान भवन के स्वतंत्रता से पहले के छाया चित्र सोशल मीडिया से उपलब्ध हुआ। भवन अपने समय में भव्य ही रहा होगा।
मल्लीताल के प्रस्तुत दुकान भवन कुमाऊं ही नहीं उत्तराखंड में भवन शैली परिवर्तन इतिहास का साक्षी भवन भी सिद्ध होगा। प्रस्तुत दुकान का भवन तिपुर व तिखंड दृष्टिगोचर हो रहा है। भवन की छत शैली स्पष्ट रूप से ब्रिटिश शैली की है। भ्यूंतल /भूतल में ककक्षों के द्वार काष्ठ ही और लगता है कि द्वारों के सिंगाड़ों में , पैनलों में ज्यामितीय कटान से द्वार व सिंगाड़ निर्मित हुए हैं।
दुकान भवन के पहली व दूसरे तल के बरामदे बाहर से काष्ठ पट्टिकाओं से ढके हैं। प्रत्येक तल में लकड़ी के झरोखे /गवाक्ष /छाज निर्मित हैं। काष्ठ की पट्टिकाएं /पैनल्स सभी ज्यामितीय कटान से निर्मित हुए हैं। भवन के काष्ठ पट्टिकाओं /तख्तों/द्वारों /झरोखों के द्वारों में केवल ज्यामितीय कटान दृष्टिगोचर हो रहे हैं। छायाचित्र में कहीं भी काष्ठ में प्राकृतिक व मानवीय कला अलंकरण दृष्टिगोचर नहीं हो रहे हैं।
भवन के भ्यूं तल व पहले तल के संधि स्थल में काष्ठ के लघु स्तम्भों के जंगले भी सजे हैं।
निष्कर्ष निकलता है कि मल्लीताल बजार , नैनीताल के ब्रिटिश युग में निर्मित दुकान भवन भव्य था व सर्वत्र ज्यामितीय कटान से ज्यामितीय अलंकरण अंकन ही दृष्टिगोचर हुए हैं।
सूचना व फोटो आभार:दिनेश बलुतिया
लेख भवन कला संबंधित है न कि मिल्कियत संबंधी। . मालिकाना जानकारी श्रुति से मिलती है अत: नाम /नामों में अंतर हो सकता है जिसके लिए सूचना दाता व संकलन कर्ता उत्तरदायी नही हैं .
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