बंशी किसना से इथगा किलै चिरड्यांद ?
चबोड्या , चखन्यौर्या , मज्जक्या : भीष्म कुकरेती
बंशी सद्यनी तरां सुबेर पूजा की जगा एक फोटो पर चक्कु नपांद अर बड़बड़ करदो - ते से बड़ो दुसमन म्यार ये जमन म नी। म्यार सरा रिस्तेदार एक असुण्या कु सुख्यर जीवन की कामना करदन अर एक मि छौं जु एक सूरत देखिक इ दुख्यर ह्वे जांद .
बंशी क नयो रूममेट - क्या रे बंशी सरा दुन्या सुबेर सुबेर भगवान से प्रार्थना करद अर तू यीं फोटो पर चक्कु नपाणु रौंद। बात क्या च आखिर ?
बंसी चक्कु तरफ घुमैक - यु म्यार दुन्या म सबसे बड़ो दुसमन च।
रूममेट - ह्यां पर किलै यु , अबोध, बेगुनाह बेगुनाह , इन्नोसेंट दिखेण वल यंग मैन त्यार दुसमन च ?
बंशी - , बेगुनाह अर यू ? अबोध अर यू ? अरे ये से बड़ो रागस आज तक पैदा इ नि ह्वे यीं दुनिया म। बेगुनाह , अबोध हूँ ! ये बड़ो जल्लाद क्वी नी च यीं दुन्या म।
रुममेट - अरे बंशी ! सूरत त देख मासूम साधी किन्तु ऊर्जावान यूथ ! रियाल इन्नोसेंट यंग मैन !
बंशी - अबे ये से बड़ो दुर्जन आज तक तीन देखि नि होलु ?
रुममेट - अरे पर येन कार क्या च ?
बंशी - अरे जु दस्यु रागस करदो उनी येन कार और क्या ?
रुममेट - बस रागस च दस्यु च , दुर्जन च की रट लगायीं च बल दुश्मन च। ह्यां बतैल त जणलु न ?
बंशी - अब क्या बथौं ?
रुममेट - ठीक च नि बथा।
बंशी - अरे सूण सूण। उ क्या च जब यु एक सालक रै होलु त मि अपण बैणि मिलणो एक गाँव ग्यों।
रुममेट - औ त क्या ह्वाई ?
बंशी -हूण क्या छौ। एक दिन दीदी बुन बिस्याइ बल ये बंशी सुबेर बिटेन ये किसना न मूत नी जरा ये तै झाड़ा करै दे। दीदीक बात मनण इ छौ। मीन किसना तै खुकली पर ले अर स्स स्सू सू बोलिक पिशाब कराइ दे।
रुममेट -औ त बंशी त्यार भणजो च ?
बंशी (दांत कीटिक ) -केक भणजो दुश्मन च दुश्मन च।
रुममेट - क्या ह्वाइ फिर ?
बंशी -अब क्या ह्वाइ जब बि पिशाब कराण हो तो दीदी मितै बुलै द्यावो। मी बि भणजु बोलिक तल्लीनता से ये तैं पिशाब करांद छौ।
रुममेट -या तो बढ़िया बात च। भणजो सेवा से पुण्य मिल्द।
बंशी -खन्नौ पुण्य मिलद। अरे मि त झाड़ा वैद्य बणी ग्यों। टट्टी हकीम ,लू , यूरीन फिजिसियन
रुममेट -क्या ?
बंशी -हाँ। दीदी अर जीजान बाबा जी कुण रैबार भयाज बल किसना बगैर बंशी क पिशाब नि कौर सकद त बंशी तै इकि रुकणा छां। बाबा जीन बोल बल ठीक च। कुछ दिन पिशाब करांद छौ फिर वु किसने बगैर म्यार खड़ हुयां टट्टी बि नि करद छौ , रात बिरांत बि मि तैं वै तै पिशाब या झाड़ा कराण पड़द छौ।
रुममेट -ओहो बड़ी दिक्कत हूंदी ह्वेली हैं ? पर भणजो सेवा त बुरी नी ना।
बंशी -अरे भणजु तै झाड़ा पिशाब कराण हो तो ठीक छौ पर फिर गाँव म लोग बाग़ अपण बच्चों तै लेक आण बिसे गेन - बल ये बंशी म्यार छुटु तैं पिशाब नी हूणी जरा सुसू बोलिक पिशाब टट्टी करै दे। अर अब कुछ दिन बाद कैक बि बच्चा तै टट्टी पिशाब कराण हो मि तै जाण पड़द छौ। म्यार नाम बंशी पधान से सुस्सू पधान ह्वे गे।
रुममेट -वास्तव म यू त मानसिक बलात्कार ही ह्वाइ भै।
बंशी -अरे यांक बाद तो गैंग रेप हूण मिसे गे।
रुममेट -विलेज गैंग रेप ?
बंशी -फिर कुछ दिन बाद गाँव बैक याने प्रौढ़ुं तै कबज ह्वे जावो या पिशाब रुक जावो तो लोग मि तैसुस्सू सुस्सू बुलणो बुलावन अर तब जैक ऊंक टट्टी पिशाब खुल्दी छे। स्कूलम बि पैल पैल प्रिंसिपलन सुस्सू कारणो बुलाई अर फिर मास्टरुंन बि सुस्सू बुलणो बुलाण शुरू कर दे। इख तक इ बात नि रुक अब त क्षेत्र वासी बि कबज या पिशाब की बीमारी म सुस्सू कराणो भट्याण मिसे गेन। मि बंशी से सुस्सू मैन ह्वे ग्यों।
रुममेट -अछेकि मानसिक प्रतड़ना ह्वे या तो। फिर ?
बंशी -फिर मि भाजिक अपण चचाम पढ़णो देहरादून ऐ ग्यों।
रुममेट -औ त अब तो मानसिक त्रास बंद ह्वे गे होली हैं ?
बंशी -क्यांक बंद। गाँव वळ कबज हो तो देहरादून ऐ जावन। अर सुस्सू बुलणो काम दे द्यावन।रुममेट -वेरी बैड। फिर छुटकारा ?
बंशी -मि देहरादून से भाजिक ममा जी म पढ़णो पटना च ग्यों
रुममेट - चलो दूर। .. पर अब किलै गुस्सा क्यांक गुस्सा ?
बंशी -अरे फिर लोगुंन फोन पर सुस्सू बुलणो रिक्वेस्ट शुरू कर दे अर अब मोबाइल पर मि तैं सुस्सू सुस्सू बुलण पड़द।
रुममेट -औ तबी तू ऑफिस म या ड्यारम मोबाइल पर सुस्सू सुस्सू चिल्लाणु रौंदी ?
बंशी -हाँ अब बि दीदी क ससुराल वळुं झाड़ा पिसाब रुक जावो तो फोन पर सुस्सू चिल्लाणो ऑर्डर दीणा रौंदन।
रुममेट - भौत तकलीफदेय स्थिति च भै। टेरीबल सिच्युएशन। वेरी टेरीबल।
बंशी -हाँ तबी त मि अपण भणजु तै अपण दुसमन मणदु।
रूममेट - बंशी ! एक मिनट हाँ म्यार गाँव बिटेन फोन च। हेलो चचा जी हेलो। प्रणाम चचा जी। हाँ हाँ मि बंशी कु रुममेट छौं। क्या ? क्या ? क्या आप तै कबज च अर चार पांच दिन से पेट नि खुल अर भौत दर्द हूणु च ? क्या क्या ? क्या बंशी से सुस्सू सुस्सू बुलणो रिक्वेस्ट करण ? ठीक च मि बंशी से सुस्सू सुस्सू बुलणो रिक्वेस्ट करदु।
(तेलगु फिल्म 'लव ऐक्शन धमाका' का एक सीन से से प्रेरित )
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