अब सचे बौड़ला?

अब सचे बौड़ला?

चलदी कूड़ी बांजी कैकी,
द्वार मोर ढैकी जयां मैती,
अब सचे बौड़ला?

छैंदी खेती पाती का,
राशन कारट लेकी खड़ा हुयां मैती,
अब सचे बौड़ला?

लम्बी चौड़ी पुंगड्यूं का पधान,
पिलाट लेकी बस्यां मैती,
अब सचे बौड़ला?

रौली,गदनी,पंदेरियों का हकदार,
नलखों मुड़ी भांडी लगाकि बैठ्यां मैती,
अब सचे बौड़ला?

हल्दा पाणिल नहे,धुए,
अस्थम पूजी जयां मैती,
अब सचे बौड़ला?

केशव डुबर्याळ "मैती"

एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ