"बोडाजी और सोशल मीडिया"
अभी कुछ माह पूर्व ही दिलवाया
बोडाजी को एंड्रॉइड फ़ोन जीत ने
घरवाले परेशान थे कि दिन भर
बड़बड़ करते रहते हैं।
जल्द ही सीख गये,
एकाउंट भी बना लिये
फेसबुक, व्हाट्सएप्प, टेलीग्राम
ट्विटर, पिकासा, इंस्टाग्राम पर।
एक अलग ही संसार मिल गया उन्हें
अपने अनुभवों को बाँटने के लिये।
पहले तो हैरान हुये
कि हम तो जिंदगी भर
मुँह चलाते रहे,
और यहाँ तो अँगूठे ही बतियाते हैं।
वर्षों से क्रोध अंदर ही रहा
पर यहाँ तो अँगूठे भी गलियाते हैं।
कहीं मिलो तो बताता हूँ
कहता था,
किन्तु यहाँ खटिया पर पड़े पड़े
भी धमकाते हैं।
हजारों पापड़ बेले
एक अदद खुशी के लिये
यहाँ तो कुरकुरे खाकर भी
मुस्कुराते हैं।
घबराते हैं, गुर्राते हैं,
शर्माते हैं, निर्लज्ज हो जाते हैं,
हँसाते हैं, रुलाते हैं,
रूठ जाते हैं, मनाते हैं,
और भी न जाने क्या क्या
कर जाते हैं।
चलो अच्छा है
इस भव सागर में
हम भी उतर जाते हैं।
(बोडाजी=ताऊजी)
©® जितेंद्र राय "जीत"

0 टिप्पणियाँ