बस दो कदम ...


बस दो कदम ...

धौलाकुआँ दिल्ली में फ़ुटओवर ब्रिज पर खडा होकर मै देख रहा था !नीचे सडक पर गाडियो की कतार. और सभी एक से एक महंगी गाडियाँ. मै खुश हो रहा था.! कभी ऐसी चकाचौंध देखी नहीं थी.! मुझे लगा फ़ैसला अच्छा था जो मै गाँव छोडकर शहर आया. !

          फ़िर कुछ दूर मेरी नजर कुछ लडके लडकियो पर पडी सभी एक साथ बैठे खिलखिला रहे थे. ! मुझे बहुत खुशी हुई सोचा कितना सुन्दर होता है शहर. कितना अपना पन है यहाँ. !

         मै और मेरे दो कदम कुछ आगे बढे मुझे एक बच्चा दिखाई दिया जो गाडियो के शीशों के पास खडा होकर. कुछ इशारे कर रहा था. ! और सभी दुत्कार रहे थे. यहाँ तक की जब मैं उस लडके के नजदीक पहुँचा तो आवाज आई. कोई महिला उस बच्चे को धमका रही थी चल हट.तेरे माँ बाप ने तुझे पैदा करके सडको पर छोड दिया भीख मांगने के लिए. !खुद नशा करके पडे होंगे साले.

           गाडियो का काफ़िला दौडने लगा वह बच्चा किनारे आया. मैने पूछा. ?

 बेटा. तेरे माँ बाप कहाँ है. ?और तुझे ऐसे क्यों छोड़ दिया अगर किसी गाडी के नीचे आ गया तो.?

          वह बोला मुझे कुछ खिला दो बडी भूख लगी है!. मै इतना मजबूर की खुद काम की तलाश में भटक रहा था.  ! सिर्फ़ दस रुपये. या उसे देता या अपने बस का किराया देता. और  मैने नहीं दिये .!!.मै स्टैन्ड पर बस का इंतजार कर रहा था कि एक बूढी महिला उस बच्चे को अपनी गोद में बिठाकर सहला रही थी. !!और वह बच्चा भूख से रो रहा था.!!..एक लड्की उस बच्चे के पास गयी और अपने टिफ़िन से रोटी निकाल कर दे आई.. एक बुजुर्ग ने कहा वाह बेटी बहुत अच्छे संस्कार दिये है तुझे. जिस घर में जायेगी स्वर्ग बना देगी. !

            लडकी बोली अंकल आप कहाँ जाब करते हैं ? बूढा बोला बेटे मेरी तीन गाडियाँ है!. ड्राईवर है उन्ही से हर रोज आकर हाजार पन्द्रह सौ रोज ले जाता हूँ !. लडकी बोली फ़िर आपने उस बच्चे को दस रुपये तक नहीं दिये क्यों.. ?

अंकल बोले बेटा मेरा बेटा गिनकर किराया देता है !और पूरा हिसाब लेता है !अगर दस पांच रुपये इधर हुये. तो फ़िर मारपीट गाली गलौज करता है.!. लडकी बोली अंकल आप दिल्ली से हो या कहीं और से.? अंकल रो दिये बोले बेटा मै उतराखन्ड से हूँ बल्कि था.!! जब से दिल्ली आया यहीं शादी की और यहीं का होकर रह गया.!. मुझे तो ये भी याद नहीं की जब मेरे माँ बाप मरे होंगे तो कैसे दिखते होंगे .!लडकी बोली आपके बच्चे कितने है. ?अंकल बोले एक लडका एक लडकी. मगर बेटे तेरी तरह नहीं है !वे. संस्कारी. !

       अचानक लडकी को गुस्सा आ गया.!! वह बोली. आप संस्कार की बात न ही करो तो अच्छा है.! और आप किसी को संस्कार दे भी नहीं सकते.! जो आदमी चंद रुपये के लिए अपने माँ बाप को देखने नहीं गया. जिसने कभी ये नहीं सोचा कि आखिर वे कैसे होंगे ?. वह आदमी इसी के लायक है. !और हाँ अंकल अगर आपने कभी किसी गैर को या किसी अपने को कुछ दिया होता. या किसी की मदद की होती और ये आपके बच्चे देखते. तो सायद आज आपको या आप जैसे लोगों को यों संस्कार खोजने की जरूरत नहीं पडती... !!

        अंकल जी संस्कार संस्कृति का रोना वही रोते है जिनमे खुद संस्कार नहीं होते..इतना बोलकर  लडकी चली गयी !!.वह अंकल खोमोश थे फ़िर हम लोगों को देखकर बोले. काश उस समय मैने दो कदम अकले न बढाये होते तो सायद आज मै भी जिंदादिल होता.. !!

बस दो कदम. मंजिल तक भी और बर्बादी तक भी शुक्रिया बेटी भगवान तुझे लम्बी उम्र दे..... और वे जाने लगे. मगर आंखें नम थी. और हल्की सी मुस्कराहट के साथ फ़िर बोले बस दो कदम......

संदीप गढवाली ©®

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