जखोली (तल्ला मवाण रुद्रप्रयाग गढ़वाल ) में राणा कुल के भव्य भवन में विशेष काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन अंकनTraditional House wood Carving Art of Jakholi, Talla Mawan , Rudraprayag :
गढ़वाल, कुमाऊँ,उत्तराखंड की भवन (तिबारी, निमदारी, बाखली , जंगलादार मकान ) में 'काठ कुर्याणौ ब्यूंत' की काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन अंकन
संकलन - भीष्म कुकरेती
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सोसल मीडिया में कभी कभी शीघ्रता के चलते सूचना दाता का नाम टंकण शेष रह जाता है। मैं इसका अपराधी हूँ। ऐसे ही मुझे जखोली में थोकदार या सामंत राणा कुल के भव्य भवन की सूचना मिली किन्तु सूचना दाता व जिनका इस भवन पर वर्तमान में स्वामित्व है की सूचना टंकण न कर सका।
जखोली (तल्ला मवाण रुद्रप्रयाग गढ़वाल ) में राणा कुल के भव्य भवन के बारे में वर्तमान वारिस ने अपने मां श्री को सूचना प्रेषित करते लिखा है कि प्रस्तुत भवन 250 वर्ष पुराना है व सामंत स्व त्रिलोक सिंह राणा इस भवन के जनक थे व यहां टिहरी रज्जा का कारागृह भी विद्यमान था। पहले भवन में संभवतया चार तिबार /तिबारियां थीं जो वर्तमान में दो तिबारियों में सिमट गयी हैं। यदि कारागृह विद्यमान था तो अवश्य ही मुख्य द्वार पर पहले तल में टेकरी /बुर्ज/छज्जा भी होना चाहिए था। प्रस्तुत राणा कुल भवन को कभी बंगला कोठी के नाम से जाना जाता था व वर्तमान में ऐतिहासिक भव्य भवन विशेष (exclusive ) है व भव्य भवन दुपुर , दुघर /दुखंड है। कला दृष्टि से भूतल /भ्यूंतल (उबर ) में दो दो खोलियों व एक कक्षों के द्वारों व पहले तल में दो दो तिबारियों में काष्ठ उत्कीर्णन पर ध्यान देना होगा।
जखोली के राणा कुल के भव्य भवन के भूतल में तीन कक्ष दृष्टिगोचर हो रहे हैं किन्तु वास्तव में एक खोली (आंतरिक सीढ़ियों हेतु प्रवेश द्वार ) थीं व दो कक्ष हैं खोली के मुख्य सिंगाड़ आयताकार उप सिंगाड़ों /स्तम्भों व आधार में कुम्भी /घट / घुंडी नुमा उप सिंगाड़ के युग्म /जोड़ से निर्मित हुए हैं। घुंडी नुमा स्तम्भ के आधार में उल्टा कमल दल अंकन हुआ है , इसके ऊपर ड्यूल है व ड्यूल के ऊपर उर्घ्वगामी /सीधा पद्म पुष्प दल है। पद्म पुष्प दल घुंडी। घट /कुम्भी आकर निर्माण करते हैं। खोली शीर्ष /मुरिन्ड /मथिण्ड के दाएं -बाएं दीवालगीर हैं और निश्चित ही पहले दीवालगीरों में हाथी , पक्षी ग्रीह्वा व पुष्प नलिका रहे होंगे।
भूतल तल में दो कक्षों में द्वारों पर काष्ठ सिंगाड़ /स्तम्भ नहीं हैं किंतु मुरिन्ड /मथिण्ड /शीर्ष में तोरणम /चाप निर्मित हुआ है। तोरणम /चाप के दांयें व बांयें भाग में डेवलगीर के चिन्ह अभी तक दृष्टिगोचर हो रहे हैं। भवन के भूतल के क्षण /खोली के शीर्ष में देव मूर्ति स्थापना के भी चिन्ह विद्यमान हैं।
सामंत राणा कुल के भव्य भवन के पहले तल में दो तिबारियां स्थापित हुयी हैं और सूचना अनुसार पहले चार तिबारियां थीं। वर्तमान में तिबारी भव्य है व तिबारी के स्तम्भ विशेष व भव्यतम श्रेणी में आते हैं। तिबारी के ऐसे स्तम्भ दुर्लभ ही पाए गए हैं। तिबारियां एक सामान हैं। दोनों तिबारियां चार चार मुख्य सिंगाड़ों /स्तम्भों से निर्मित हैं। जखोली में राणा कुल के भवन की तिबारी के प्रत्येक मुख्य स्तम्भ /सिंगाड़ चार चार उप स्तम्भों के युग्म /जोड़ से निर्मित हुए हैं।
प्रत्येक उप स्तम्भ का आधार की कुम्भी (घट पेट आकृति ) का निर्माण अधोगामी पद्म पुष्प दल के उत्कीर्णन से हुआ है। कुम्भी के ऊपर ड्यूल है व ड्यूल के ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प निर्मित है जिसके ऊपर से उप स्तम्भ लौकी आकार धारण करता है। जहाँ उप स्तम्भ की मोटाई सबसे कम है वहां उल्टा कमल दल उत्कीर्णित है जिसके ऊपर ड्यूल है व ड्यूल के ऊपर खिला कमल पुष्प है। यहां से दो उप स्तम्भों से थांत आकृति उभरती है। दूसरी ओर अर्ध चाप उभरता है जो सामने के उप स्तम्भ के अर्ध चाप से मिल पूरा तोरणम /चाप /arch निर्माण करता है। तोरणम में उत्कीर्ण कला के चीन शेष हैं किंतु स्पष्ट नहीं हैं। उप स्तम्भों के चाप /तोरणम ऊपर मुरिन्ड के चौखट कड़ी से मिलते हैं . मुरिन्ड /मथिण्ड की चौखट सुडौल कड़ी में चित्रांकन अवश्य ही हुआ है जो छायाचित्र में स्पष्ट नहीं है।
निष्कर्ष निकलना सरल है कि राणा कुल के भव्य भवन में ज्यामितीय , प्राकृतिक व मानवीय अलंकृत कला उत्कीर्णन हुआ है।
ध्यान दें -
सूचनादाता जो वर्तमान में भवन के भागीदार हैं ने अपने मां श्री (जिन्होंने मुझे सूचना दी कि प्रस्तुत भवन 250 वर्ष प्राचीन है व टिहरी के सामंत की है व टिहरी राजा का कारागृह है। यदि इस भवन में टिहरी राजा का कारागृह था तो यह भवन 250 वर्ष प्राचीन होने में संदेह होता है। टिहरी राज्य की स्थापना 1815 -16 में हुआ।
सूचनादाता ने अपने मामा श्री को सुचना दी कि अब भवन में कोई नहीं रहता है व मैठाणा देवी के ठौ में प्रतिदिन पूजा होती है।
सूचना व फोटो आभार: परम मित्र
* यह आलेख भवन कला संबंधी है न कि मिल्कियत संबंधी, भौगोलिक स्तिथि संबंधी। भौगोलिक व मिलकियत की सूचना श्रुति से मिली है अत: अंतर के लिए सूचना दाता व संकलन कर्ता उत्तरदायी नही हैं .
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