होली है


होली है

 

देख तुम्हे अँखियां झुके

अधर भये हैं लाल

तेरी आँखों से रंग ले

काले भय ये बाल।

 

यूँ टकटकी लगा ना देखो

थोड़ी कर लो लाज

मैं लज्जा से भीग रही

होली हो गयी आज।

 

गौरी तुझको जब देखूँ

खिल जाये सारे रंग

आपा अपना खो जाऊँ

ज्यूँ पिला दी हो भंग।

 

होली है मिलने भी दो

अब अधरों के रंग

छोड़ो लाज की पोटली

तुम चलो हमारे संग।

 

भर भर के मैं रंग लाया

रंग दूँ तुझको आज

आओ तुम सन्मुख मेरे

छोड़ो तुम ये लाज।

 

तुम्हे रंगों की जरुरत नहीं

"राजू" छू लो मेरे गाल

लज्जा के मारे गाल मेरे

खुद हो जायेंगे लाल।

 

© राजू पाण्डेय

ग्राम - पो. बगोटी (चम्पावत)

यमुनाविहार - दिल्ली


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