साँची माया चिताणू रौं
मेरी आँख्यूं मा तेरी याद छै,मि आँसू न तीस मुंझाणू रौं,
मुख ऐथर त तु ऐ नि छै,मि स्वीणौं मा त्वे खोज्याणू रौं।
दूर चलिगे,जख गै ह्वेली,दूर दूर कखि दिखे नि छै,
कभी त ऐली मीमा बौडी,मि फगत मन तैं बुथ्याणू रौं।
अटगणू रौं मी भटकणू रौं,धार ओर कभी धार पोर,
तू रै निर्मोही सी ढोंग कनू,अर मि त्वे खुण जिया झुराणू रौं।
त्यारा मन म कुछ हौरी छै,मिल स्वाच कुछ हौरी च,
अर मि सुद्दी त्वे फर अपडी,ज्यू ज्यान लुटाणू रौं।
या त तू कुछ समझी नि छै,या अजाण बणी तू जाणी भी,
चार दिना हैंस्यां खेल्यां तैं मि,साँची माया चिताणू रौं।
- आकृति मुण्डेपी

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